Thursday, December 18, 2008

जब से तुम ...

जब से तुम मेरी जिंदगी में आए,
खुशियों की अनगिनत सौगात लाये,
ख्यालों में बस तुम आने लगे हो अब,
न जाने क्यों ऐसे सपने दिखलाये...

तेरे बिना कितनी अकेली थी मैं,
सुहाने सपनो की सहेली थी मैं,
तुम मिले तो जीना सीखा हमने,
एक अनसुलझी सी पहेली थी मैं...

तू जब मुझे देख के मुस्कुराता है,
आंखों से प्यार के तीर चलता है,
अजीब सी गुदगुदी होती है सीने में,
जब मेरी जुल्फों को छेड़ जाता है ...

तेरे एक स्पर्श से जिस्म पिघल जाती है,
न देखूं तुम्हे तो जान निकल जाती है,
तेरी एक आहट से मन में कुछ होता है,
तुझे सोच के तबीयत मचल जाती है...

तेरे साथ अब यूँ ही चलती जाऊं,
हर जनम तुझे ही अपना बनाऊ,
गम तेरे हिस्से के मेरे दामन में हो
तेरी एक ख़ुशी पे जिंदगी लुटाऊं...





3 comments:

  1. हिंदी लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे बढ़िया लिखे। हजारों शुभकामनांए।
    कृपयर सैटिंग में जाकर वर्ड वैरिफिकेशन हटा दें । इससे टिप्पणी देने मे परेशानी होती है।

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  2. आपका चिटठा जगत में स्वागत है निरंतरता की चाहत है अत्यन्त भावभीनी कविता
    मेरे ब्लॉग पर भी पधारें

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