Wednesday, December 17, 2008

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
तुझे अपना बनाना चाहूं तो बुरा ना मानना,
लोग तो चंद लम्हों में रिश्ते तोड़ लेते हैं,
हर जनम तेरा साथ निभाऊं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
हर साँस में तुझे बसा लूँ तो बुरा ना मानना,
सागर सी गहरी हैं तेरी ये कजरारी आँखें,
अगर जो इनमे डूबना चाहूं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
दिल की गहराई में उतर जाऊं तो बुरा ना मानना,
किसी के जज्बात से खेलने की मेरी आदत नही,
तेरी रेशम सी जुल्फों से खेलूँ तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
होठों पे हँसी सजाना चाहूँ तो बुरा ना मानना,
गम और खुशी तो जिंदगी के दो पहलू हैं ,
हमसफ़र बन साथ चलना चाहूं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
बन के साया तेरे साथ रहूँ तो बुरा ना मानना,
दिल की हर धड़कन में बस तू ही समाई है,
कभी दिल चीर के दिखाऊं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
तेरा हाथ, हाथ में लेना चाहूं तो बुरा ना मानाना,
ना आने अब अंधेरे से डर सा लगने लगा है,
तेरे आँचल में छुप जाऊं तो बुरा ना मानना ...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
तुझे हर उमर ऐसे ही चाहूं तो बुरा ना मानाना ,
लोग मुहब्बत में जिंदगी तक बरबाद करते हैं,
चाहत में ख़ुद को मिटा लूँ तो बुरा ना मानाना ...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
साँसों पे नाम लिख जाऊं तो बुरा ना मानाना ,
जितना बे-करार रहता हूँ मैं तेरे लिए हर घड़ी ,
कभी तुझे इतना तरसाऊं तो बुरा ना मानाना ...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
आंखों से प्यार जाताना चाहूँ तो बुरा ना मानना ,
प्यार में किसी को आजमाने का हमे शौक नही ,
कभी तुझे जो आजमाउन तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना...
तुझे अपना बनाना चाहूं तो बुरा ना मानना ...





















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