उम्मीद की कश्ती में सपनो का बसेरा है,
तनहा सी शाम और उदास सा सवेरा है,
पलकें बंद हो तो उजाला है तेरे नाम से,
आँखें जो खुले तो दूर तक अँधेरा है...
नर हो ना निराश करो मन को ..
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नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रहके निज नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न ...
14 years ago
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