Thursday, December 18, 2008

अँधेरा...

उम्मीद की कश्ती में सपनो का बसेरा है,
तनहा सी शाम और उदास सा सवेरा है,
पलकें बंद हो तो उजाला है तेरे नाम से,
आँखें जो खुले तो दूर तक अँधेरा है...

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