यूं हकीकत से भागे मुह छिपाकर,
ज़माने की हर मुसीबत भुलाकर,
साहिल पे खड़े सोच रहे थे कुछ,
देखा लहरें भी लौट गयी टकराकर ...
नर हो ना निराश करो मन को ..
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नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रहके निज नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न ...
14 years ago
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