Thursday, December 18, 2008

जब से तुम ...

जब से तुम मेरी जिंदगी में आए,
खुशियों की अनगिनत सौगात लाये,
ख्यालों में बस तुम आने लगे हो अब,
न जाने क्यों ऐसे सपने दिखलाये...

तेरे बिना कितनी अकेली थी मैं,
सुहाने सपनो की सहेली थी मैं,
तुम मिले तो जीना सीखा हमने,
एक अनसुलझी सी पहेली थी मैं...

तू जब मुझे देख के मुस्कुराता है,
आंखों से प्यार के तीर चलता है,
अजीब सी गुदगुदी होती है सीने में,
जब मेरी जुल्फों को छेड़ जाता है ...

तेरे एक स्पर्श से जिस्म पिघल जाती है,
न देखूं तुम्हे तो जान निकल जाती है,
तेरी एक आहट से मन में कुछ होता है,
तुझे सोच के तबीयत मचल जाती है...

तेरे साथ अब यूँ ही चलती जाऊं,
हर जनम तुझे ही अपना बनाऊ,
गम तेरे हिस्से के मेरे दामन में हो
तेरी एक ख़ुशी पे जिंदगी लुटाऊं...





जुल्फों का पहरा...

चाँद से चेहरे पे जुल्फों का पहरा है,
आंखों का नशा समुन्दर से गहरा है,
नज़र ना लग जाए आज किसी की,
ख्वाब ही सही, कहने को तो मेरा है ...

अँधेरा...

उम्मीद की कश्ती में सपनो का बसेरा है,
तनहा सी शाम और उदास सा सवेरा है,
पलकें बंद हो तो उजाला है तेरे नाम से,
आँखें जो खुले तो दूर तक अँधेरा है...

लहरें ...

यूं हकीकत से भागे मुह छिपाकर,
ज़माने की हर मुसीबत भुलाकर,
साहिल पे खड़े सोच रहे थे कुछ,
देखा लहरें भी लौट गयी टकराकर ...

एहसान ..

किसी को भूलना होता आसान इतना,
तो कभी तनहा न होता इंसान इतना,
मेरी यादों को दफ़न कर देना सीने में,
करोगी क्या मुझपे एहसान इतना....

आपकी कसम ...

फिजा को चमन के बहारों ने लूटा,
सागर को लहराते किनारों ने लूटा,
आप तो हमारी एक कसम से रूठ गए,
आपकी कसम देकर हमे हजारों ने लूटा...

तेरा साथ जो होता ...

तेरा साथ होता तो हालात बदल सकते थे,
आंसू गम के बदले खुशी के निकल सकते थे,
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह,
दरिया जो बन जाते तो दूर तक निकल सकते थे...

Wednesday, December 17, 2008

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
तुझे अपना बनाना चाहूं तो बुरा ना मानना,
लोग तो चंद लम्हों में रिश्ते तोड़ लेते हैं,
हर जनम तेरा साथ निभाऊं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
हर साँस में तुझे बसा लूँ तो बुरा ना मानना,
सागर सी गहरी हैं तेरी ये कजरारी आँखें,
अगर जो इनमे डूबना चाहूं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
दिल की गहराई में उतर जाऊं तो बुरा ना मानना,
किसी के जज्बात से खेलने की मेरी आदत नही,
तेरी रेशम सी जुल्फों से खेलूँ तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
होठों पे हँसी सजाना चाहूँ तो बुरा ना मानना,
गम और खुशी तो जिंदगी के दो पहलू हैं ,
हमसफ़र बन साथ चलना चाहूं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
बन के साया तेरे साथ रहूँ तो बुरा ना मानना,
दिल की हर धड़कन में बस तू ही समाई है,
कभी दिल चीर के दिखाऊं तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
तेरा हाथ, हाथ में लेना चाहूं तो बुरा ना मानाना,
ना आने अब अंधेरे से डर सा लगने लगा है,
तेरे आँचल में छुप जाऊं तो बुरा ना मानना ...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
तुझे हर उमर ऐसे ही चाहूं तो बुरा ना मानाना ,
लोग मुहब्बत में जिंदगी तक बरबाद करते हैं,
चाहत में ख़ुद को मिटा लूँ तो बुरा ना मानाना ...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
साँसों पे नाम लिख जाऊं तो बुरा ना मानाना ,
जितना बे-करार रहता हूँ मैं तेरे लिए हर घड़ी ,
कभी तुझे इतना तरसाऊं तो बुरा ना मानाना ...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना,
आंखों से प्यार जाताना चाहूँ तो बुरा ना मानना ,
प्यार में किसी को आजमाने का हमे शौक नही ,
कभी तुझे जो आजमाउन तो बुरा ना मानना...

एक बात कहूं तो बुरा ना मानना...
तुझे अपना बनाना चाहूं तो बुरा ना मानना ...





















Kuch naya karne ki sochta hoon...

फिर एक बार मरने की सोचता हूँ,
कुछ नया करने की सोचता हूँ,
जो मिल जाए आज साथ किसी का,
तो हद से गुजरने की सोचता हूँ...

भटक रहा हूँ अकेली जान लिए,
एक नन्हा सा दिल परेशान लिए,
कोई खेल ले आज इस खिलोने से,
वक्त भी रुका हो जैसे इम्तेहान लिए.

नर्म सांसों का जो एक सहारा मिल जाए,
जिंदगी की किश्ती को किनारा मिल जाए,
डूब से जाएँ भंवर सी उन् आंखों में हम,
बस एक बार किसी का इशारा मिल जाए...

चकोर जैसे तरसने की सोचता हूँ,
मुहब्बत बनके बरसने की सोचता हूँ,
लोग कहते हैं आग का दरिया जिसे,
उस समुन्दर में उतरने की सोचता हूँ...

फिर एक बार मरने की सोचता हूँ...
कुछ नया करने की सोचता हूँ...