Saturday, June 27, 2009

जब कोई शक्श...

जब कोई शक्श हमे याद आता है...

उनका चेहरा आँखों पे छा जाता है...

निहारते हैं जब हम बीते लम्हों को...

मुश्किल से दिल उन्हें भुला पाता है......


सपना एक सुहाना तो टूटना ही था...

अपनों को हमसे तो कभी रूठना ही था...

उमीदों के डोर से बंधी थी ये दामन मेरी...

इस रिश्ते को कभी तो टूटना ही था.....


वक़्त को हमने यूँ निकल जाने दिया...

जिंदगी को जीने के हज़ार बहाने दिया...

मालूम था हमे नतीजा दिल्लगी का...

फिर भी किस्मत को आजमाने दिया.....


2 comments:

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    1. Dude awsome lines....
      Truth f lyf so well expressed in ur words....(y)

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